प्रधानमंत्री ने मंगलवार को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से लगभग 50 मिनट तक मुलाकात की। आपको पता होगा कि प्रतिभा पाटिल का चुनाव सोनिया गांधी ने किया था। अब वक्त आ गया है कि राष्ट्रपति सोनिया गांधी की मदद करें। हो सकता है वामपंथी द्वारा समर्थन वापस लेने पर राष्ट्रपति मनमोहन सरकार को बहुमत साबित करने के लिए न कहे।
राष्ट्रपति कोई भी निर्णय लेने से पहले कांग्रेस की इच्छा जानने का प्रयास करती है फिर उस निर्णय पर अमल करती है। प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद राष्ट्रपति भवन से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय मुद्दों के अलावा प्रधानमंत्री की अगामी जापान यात्रा के बारे में बाचीत हुई। वास्तव में चुनाव टालने के लिए देश में एक बार फिर से आपातकाल लगाने का महौल बनाया जा रहा है। जिससे प्रमाणु संधि सम्पन्न हो सके। कांग्रेस पार्टी ने स्वर्गीय गांधी के समय किया था लगता है इतिहास दोहराने का वक्त आ गया है।
कांग्रेस को पता है कि चुनाव होने पर वह नहीं जीत सकती है। इस लिए देश में आपातकाल लगाकर दो से तीन वर्ष तक शासन करना चाहती है ताकि बढ़ते हुए कीमतों पर काबू पा सकें। इसका अर्थ है प्रमाणु समझौता करने के लिए सरकार किसी भी हद तक जा सकती है। यानी अपातकाल के बारे मे सोच सकती है