पंचायत चुनाव के हार से उबर रहे पश्चिम बंगाल के वामपंथियों को मतदाताओं ने एक और झटका दिया। हाल ही में स्थानीय निकाय के चुनाव में वाम मोर्चे की पुन: हार हुई है।
29 जून को हुए 13 नगरपालिका के चुनाव परिणाम माकपा को निराश करने वाली है। उसने तीन नगर पालिका में तृणमूल कांग्रेस से हारी और चौथी कांग्रेस पार्टी से। जब 2003 में चुनाव हुए थे तो उसने 10 नगरपालिका में विजय हासिल की थी जो अब घटकर 6 हो गई।
इस चुनाव परिणाम ने पश्चिम बंगाल के माकपा को हिला कर रख दिया है। माकपा जो केन्द्र में यूपीए सरकार से समर्थन वापसी करने जा रही है। उसके लिए यह चुनाव परिणाम सदमें से कम नहीं है। एक वामपंथी नेता के अनुसार अगर लोकसभा चुनाव अभी हुए तो हमें काफी सीटों का नुकशान उठाना पड़ सकता है। माकपा ने वर्धमान नगर पालिका का चुनाव भी हारा जो दशकों से उसका गढ़ हुआ करता था।
माकपा के नेता को यह समझ में नहीं आ रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी क्षेत्रों के मतदाता उसके विरूद्ध क्यों मतदान कर रहे हैं। इसके पीछे कोई न कोई वजह तो होगी। वक्त रहते माकपा ने वजह पता कर सुधरने की कोशिश नही की तो लोकसभा के चुनाव परिणाम उसके लिए ही नहीं उसके समर्थकों के लिए भी सदमा बनेगा।