वामदलो की सरकार से समर्थन वापसी पर चल रही बैठक खत्म हो गई है। वामदलो ने सरकार को 7 जुलाई तक का समय दिया है और कहा है कि परमाणु संधि पर अपना रूख स्पष्ट करें।
वामदलो ने विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी जो सरकार और वामदलो के बीच बनी समिति के संयोजक है को पत्र लिखकर पूछा है कि वे साफ तौर पर बतायें कि सरकार परमाणु संधि मसले पर आगे क्या करने जा रही है। यह बात अब साफ हो गई है कि वाम मोर्चा आज और प्रधानमंत्री के G- 8 सम्मेलन में जाने से पहले समर्थन वापस नहीं लेगें।
माकपा के आंकलन के अनुसार यदि वे समर्थन वापस लेते है तो सरकार अल्पमत में आ जायेगी और G- 8 के बैठक में जहां पर प्रधानमंत्री 9 जुलाई को अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज बुश से मिलने वाले है,उसकी महता कम हो जायेगी।
लेकिन माकपा के सहयोगी इस बात से सहमत नहीं थे। सीपीआई महासचिव ए बी वर्धन के अनुसार सरकार से समर्थन वापसी और प्रधानमंत्री के G-8 के बैठक में जाने से कोई संबंध नहीं है। वामदलों के और कई नेताओं का यह मानना है कि यह उचित नहीं होगा कि प्रधानमंत्री अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने जा रहे हों और सरकार समर्थन वापस ले लिया जाय।
वाम मोर्चा के ज्यादातर नेताओं का मानना था कि उसे अपने पुराने रूख पर कायम रहना चाहिए। जिसके तहत सरकार आईएईए से वार्ता के लिए वियाना जाये तब समर्थन वापस लेना चाहिए।