अमरनाथ विवाद ने बीजेपी को खुल कर हिंदुओं की वकालत करने का एक बड़ा बहाना दे दिया है। बीजेपी नेता 6 से 11 जुलाई के बीच मुंबई, भोपाल, चेन्नै, वाराणसी, हैदराबाद, जयपुर, हरिद्वार और जम्मू में अमरनाथ विवाद पर रैलियों को संबोधित करेंगे। मुंबई में 11 जुलाई को आडवाणी, 8 जुलाई को भोपाल में राजनाथ सिंह, चेन्नै व वाराणसी में 8 व 11 जुलाई को मुरली मनोहर जोशी, हैदराबाद व जयपुर में 7-9 जुलाई को वेंकैया नायडू, हरिद्वार में 10 जुलाई को सुषमा स्वराज व जम्मू में 6 जुलाई को अरुण जेटली रैलियों को संबोधित करेंगे। बीजेपी इन रैलियों में यह कह कर हिंदुओं की भावनाओं को उद्वेलित करेगी कि 100 करोड़ हिंदुओं के देश में हिंदू तीर्थ यात्रियों के लिए 100 एकड़ जमीन भी मुहैया नहीं।
कांग्रेस देश के बहुसंख्यक हिंदू की उपेक्षा नहीं कर सकती। बीजेपी का मानना है कि यह मुद्दा उसके लिए चुनावी फायदे का बड़ा मुद्दा साबित होगा। इन रैलियों में वह जम्मू-कश्मीर व केंद्र की कांग्रेस सरकार पर ही सांप्रदायिक होने का आरोप मढ़ेगी। पार्टी के नेता रैलियों में यह बात रखेंगे कि हर धर्म के तीर्थ यात्रियों को सुविधाएं मिलनी चाहिए। वह हज का वास्ता देकर कहेगी कि बीजेपी ने इसका कभी विरोध नहीं किया। फिर अमरनाथ के हिंदू तीर्थयात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं का विरोध क्यों। यह मसला हिंदू व मुसलमानों के बीच का नहीं बल्कि हिंदू बनाम कांग्रेस का है। बीजेपी ने अमरनाथ मसले को हवा देकर अपने पक्ष में हिंदू ध्रुवीकरण के लिए रैलियों का व्यापक कार्यक्रम बनाया है जिन्हें लालकृष्ण आडवाणी, पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सहित तमाम बड़े नेता संबोधित करेंगे।