 यूएनपीए,वामदल और मायावती |
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वामदलों, यूएनपीए औरबहुजन समाज पार्टी के नए मोर्चे ने भारत-अमरीका परमाणु समझौते, मूल्य वृद्धि और किसानों की समस्याओं के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने का फैसला किया है। साम्प्रदायिकता और सीबीआई जैसे संस्थानों के कथित दुरूपयोग के खिलाफ भी अभियान चलाया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक वामदलों ने बसपा, यूएनपीए, अजित सिंह, एचडी देवेगौड़ा और दूसरे कई दलों के साथ मिलकर सरकार गिराने जो रणनीति बनाई थी, उसमें कामयाब न होने से उन्हें बड़ी निराशा हाथ लगी है। उन्हें उम्मीद थी कि सरकार गिर जाएगी और वे खुद को तीसरे राजनीतिक विकल्प के रूप में खड़ा करेंगे बहुजन समाज पार्टी प्रमुख सुश्री मायावती के निवास पर मोर्चे के नेताओं की बैठक में विश्वास मत में सरकार की विजय को अनैतिक बताया गया।
इस बैठक में अन्य लोगों के अलावा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश करात, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता ए बी वर्धन, तेलगुदेशम पार्टी के नेता चन्द्र बाबू नायडू, जनता दल सेक्युलर के प्रमुख एच डी देवेगौड़ा, राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख अजीत सिंह, इंडियन नेशनल लोकदल के नेता अजय चौटाला और झारखंड विकास मोर्चा के नेता बाबू लाल मरांडी ने हिस्सा लिया। मार्क्सवादी नेता श्री प्रकाश करात ने कहा कि सरकार ने जिस तरह से संसद में विजय प्राप्त की है उससे उसने सत्ता में रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है। करात ने साफ कहा कि हम यहां पांच अहम मुद्दों को जनता के सामने उठाने के लिए इकट्ठा हुए हैं। यह पूछने पर कि इसका नेता कौन है? मायावती ने कहा, 'सभी बराबर के नेता हैं।'
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