मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी माकपा ने लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी की पार्टी की सदस्यता समाप्त कर दी है। यह फैसला तत्काल लागू हो गया है। नई दिल्ली में जारी पोलित ब्यूरो की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि श्री चटर्जी को पार्टी की नीति के खिलाफ कदम उठाने के आरोप में निष्कासित किया गया है और यह फैसला पार्टी संविधान के अनुसार सर्वसम्मति से किया गया। उन्यासी वर्षीय श्री सोमनाथ चटर्जी करीब चार दशक से पार्टी से जुड़े रहे। वे पुराने वकील हैं और दस बार सांसद रहे हैं। श्री चटर्जी का मानना है कि जून 2004 में लोकसभा अध्यक्ष के गरिमामय पद पर सर्वसम्मति से चुने जाने से वह दलगत राजनीति से ऊपर हैं। श्री चटर्जी ने अपनी पार्टी के फैसले पर कोई भी प्रतिक्रिया व्यक्त करने से इन्कार कर दिया।
जहां एक ओर वाम दलों ने श्री सोमनाथ चटर्जी की आलोचना की है वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और उसके सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल ने लोकसभा अध्यक्ष के रूप में उनके कार्य की बड़ी सराहना की है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता ए बी बर्धन ने श्री चटर्जी को पार्टी से निकाले जाने के माकपा पोलित ब्यूरो के फैसले को उचित ठहराया है। आरएसपी नेता टी जे चंद्रचूड़ ने कहा है कि पार्टी निर्देशों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होनी ही चाहिए। उधर, कांग्रेस प्रवक्ता जयंती नटराजन ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में इस तरह का फैसला अभूतपूर्व है। श्रीमती नटराजन ने कहा कि यह उनकी पार्टी का अपना फैसला है।राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद ने सी.पी.आई.एम. के फैसले को हताशा में उठाया गया कदम बताया है।
पश्चिम बंगाल में माकपा. के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे के अध्यक्ष और पोलित ब्यूरो सदस्य बिमान बोस ने कहा है कि पार्टी के किसी भी सदस्य को भी पार्टी अनुशासन तोड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती।