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Fri, 12 Sep 2008 13:37:00

भाजपा की बंगलौर बैठक

पार्टी अभी तक उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में गठबंधन का फ़ैसला नहीं कर पाई है और पार्टी नेतृत्व में गठबंधन के कुछ साथियों को लेकर भी रस्साकशी चल रही है। पार्टी को यह भी तय करना है कि चुनावी मुद्दे कौन-कौन से होंगे, महंगाई और आतंकवाद, अमरनाथ विवाद, आंतरिक सुरक्षा। अभी पार्टी में इस विषय पर मतभेद है कि भारत अमरीका परमाणु करार का विरोध क्या सही होगा?

भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की तीन दिनों की बैठक शुक्रवार से  बंगलौर में शुरु हो रही है। छह राज्यों के विधानसभा चुनावों और संभावित लोक सभा चुनावों के पहले हो रही इस आख़िरी कार्यकारिणी का महत्व राजनीतिक रुप से बढ़ गया है।

कर्नाटक में पहली बार सरकार बनाकर दक्षिण भारत में क़दम रखने वाली पार्टी के लिए इस स्थान का भी बहुत सांकेतिक महत्व है। शायद इसीलिए भाजपा के झंडे और भगवा रंग की धूम बंगलौर में नज़र आ रही है। ऐसा लगता है कि दक्षिण भारत में अपनी इस पहुँच को ज़ोर-शोर से पेश करना चाहती है।इस कार्यकारिणी का महत्व आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों को देखते हुए बढ़ गया है और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी के तेवर भी कार्यकारिणी का रुख़ स्पष्ट करते हैं।

उन्होने कहा, "कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के ख़िलाफ़ आक्रामक भांडाफोड़ अभियान और आने वाले चुनावों में राष्ट्रवादी विजय संकल्प की रणनीति के लक्ष्य के साथ भाजपा ने इस कार्यकारिणी का आयोजन किया है।" इस कार्यकारिणी में राजनाथ सिंह अध्यक्षीय भाषण देंगे तो लाल कृष्ण आडवाणी कार्यकारिणी के अंत में मार्गदर्शन भाषण देंगे।पार्टी एक विजय संकल्प रैली का भी आयोजन करेगी और इसके साथ ही देश भर में ऐसी डेढ़ सौ रैलियों का आयोजन किया जाएगा जिसे पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और एनडीए के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी संबोधित करेंगे।

नवंबर में छह राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और मिज़ोरम में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और झारखंड की राजनीतिक स्थिति अस्थिर बनी हुई है। इसलिए चुनावी रणनीति इस बैठक में एजेंडे पर सबसे ऊपर होंगे।पार्टी पहले ही अलग-अलग राज्यों के लिए चुनाव समितियाँ बना ही चुकी है। अब देश भर से आए दो सौ से ज़्यादा प्रतिनिधि एकसाथ मिलकर विचार मंथन कर पाएँगे।पार्टी को एनडीए गठबंधन के पुराने साथियों से संबंध पुख़्ता करने हैं और नए साथियों की खोज में भी तेज़ी लानी है।

पार्टी अभी तक उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में गठबंधन का फ़ैसला नहीं कर पाई है और पार्टी नेतृत्व में गठबंधन के कुछ साथियों को लेकर भी रस्साकशी चल रही है। पार्टी को यह भी तय करना है कि चुनावी मुद्दे कौन-कौन से होंगे, महंगाई और आतंकवाद, अमरनाथ विवाद, आंतरिक सुरक्षा। अभी पार्टी में इस विषय पर मतभेद है कि भारत अमरीका परमाणु करार का विरोध क्या सही होगा?


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