स्वास्थ्य खराब होने के कारण भले ही पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने भाजपा की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शिरकत नहीं की हो, लेकिन यह बैठक उनकी छाया से मुक्त नहीं हो पाई तथा प्रधानमंत्री पद के पार्टी उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि वह उनके बिना अकेला महसूस करते हैं।वाजपेयी के साथ करीब आधा शताब्दी तक राजनीति में रह चुके आडवाणी ने कहा कि वाजपेयी के बिना अपने को अकेला पाता हूँ और मैं उनकी कमी महसूस करता रहा हूँ।
आडवाणी ने बैठक में समापन भाषण करते हुए कहा कि मैं उनकी उपस्थिति महसूस करता हूँ। मैं उनके दिशा-निर्देश और साथ की कमी महसूस करता हूँ। आप लोगों ने मुझे जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसे निभाने में कई बार मैं अपने को अकेला पाता हूँ। मुझे आपके समर्थन की जरूरत है, सक्रिय और उत्साह से भरे समर्थन की।
राम जन्मभूमि रथयात्रा के कारण राष्ट्रीय राजनीति में प्रमुखता से उभरने वाले आडवाणी ने 1990 के दशक स्वयं ही यह घोषणा की थी कि यदि भाजपा सत्ता में आई तो वाजपेयी प्रधानमंत्री बनेंगे। माना जा रहा है कि इसी के जवाब वाजपेयी ने इस बार बैठक के लिए भेजे गए अपने संदेश में पार्टीजनों से आडवाणी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए तन-मन-धन से प्रयास करने को कहा है।
आडवाणी ने बैठक में अपने विरोधी और पूर्व पार्टी अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी की भी सराहना की। अमरनाथ भूमि विवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा इस दिन हमें गर्व के साथ यह भी स्मरण करना चाहिए कि हमारे अपने नेता जोशी ने श्रीनगर के लाल चौक में राष्ट्रीय ध्वज फहराने का साहस दिखाया था। जोशी को हाल में पार्टी की चुनाव घोषणा-पत्र समिति का प्रमुख बनाया गया है।