उनके अनुसार भारत कभी भी इस संधि से अपने आपको अलग कर सकता है। यदि भविष्य में ऐसी स्थिति आती है तो। इस बात पर जोड़ देते हुए कि भारत के परमाणु संस्थान है वह यूरोनियम पर आधारित है और हमारे पास यूरोनियम के प्रर्याप्त भंडार नही है। इसको पाने के लिए हमें और देशों से मदद लेनी पड़ेगी।
कलाम जो एनडीए के द्वारा राष्ट्रपति के उम्मीदवार भी बनाये गये थे उनकी टिप्पणी तब आई जब सरकार ने वाम दलो से गुहार लगाया कि कम से कम आईएईए से समझौता करने की मंजूरी दी जाये। हमारे पास थोरियम मौजूद है फिर इसको परिस्कृत करने में पांच से सात साल लग सकते है। लेकिन वर्त्तमान में जो बिजली घर है उसको चलाने के लिए यूरोनियम की जरूरत है। कलाम ने आगे कहा कि ये देश भारत को शोध करने से नही रोक सकते है।
इसलिए हमें भारत अमेरिका परमाणु असैनिक संधि पर हस्ताक्षर करना चाहिए, इसे हमारी सार्वभौमिकता पर खतरा नही है और जरूरत पड़ने पर हम संधि से अपने आपको अलग भी कर सकते है। यह पूछे जाने पर भारत को पोखरन III करने की जरूरत है तो उनका कहना था कि इसकी अभी आवश्यकता नही है। उन्होंने भारत के आर्थिक और सामरिक तरक्की पर संतोष व्यक्त किया। उनके अनुसार 1991 में आर्थिक सुधार लागू होने के बाद से भारत तरक्की की राह पर अग्रसर है। कलाम के अनुसार 1998 में विस्फोट के बाद देश का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। इसके बावजूद कि कई देशों ने आर्थिक और तकनीकी तौर पर प्रतिबंध लगाये थे।
पूर्व राष्ट्रपति के अनुसार भारत के तरक्की को देखरकर विश्व के कई राष्ट्र हैरान हैं । हमारी आर्थिक विकास दर 8 से 9 प्रतिशत प्रतिवर्ष है। अग्नि III का सफल परीक्षण इस बात की ओर इंगित करता है कि देश सही दिशा में जा रहा है।