नई दिल्ली में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन भवन में राष्ट्रीय टैक्नोलॉजी दिवस के सिलसिले में अपने भाषण में उन्होंने कहा कि इसी से भारत के लोग देश के विकास में भागीदार बन सकेंगे।
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन डीआरडीओ के स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित समारोह में डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहा कि देश को इस संगठन की उपलब्धियों पर गर्व है। उन्होंने कहा कि उच्च टेक्नोलॉजी का विकास जटिल और बहुत ज्यादा समय लेनेवाली प्रक्रिया है लेकिन डीआरडीओ के पास उपलब्ध विशेषज्ञता का फायदा उठाते हुए सशस्त्र सेनाओं को टेक्नोलॉजी और उपकरण समय पर उपलब्ध कराने के सभी प्रयास किये जाने चाहिएं। उन्होंने कहा कि हमारी सेनाओं को उपयुक्त टेक्नोलॉजी उपलब्ध हो जाने पर वे अपनी क्षमता और अधिक बढ़ा सकेंगे। देश में वैज्ञानिक और इंजीनियरी प्रतिभाओं के विकास की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी विदेशी चुनौती का सामना करने के लिए सरकार रक्षा उद्योग के आधार को व्यापक बनाने को वचनबद्ध है।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने देश के सबसे बड़े रॉकेट वैज्ञानिकों वी.के. शाश्वत और दीपांकर बनर्जी को पुरस्कृत किया। अविनाश चंद्र के नेतृत्व में वैज्ञानिकों के दल को महत्वपूर्ण खोज के लिए डी.आर.डी.ओ. पुरस्कार दिया गया। रक्षा अनुसंधान का सबसे बड़ा पुरस्कार एयरोनॉटिकल डिफेंस एजेंसी, बंगलौर को मिला।
अपने भाषण में रक्षामंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार एम नटराजन ने कहा कि जब तक भारत प्रोपलशन, नेवीगेशन, सेन्सर और विशेष पदार्थ जैसे क्षेत्रों में क्षमता हासिल नहीं कर लेता तब तक वह महत्वपूर्ण भौगोलिक और राजनैतिक शक्ति के रूप में अपना सही स्थान प्राप्त नहीं कर सकेगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वैज्ञानिकों को आकर्षक वेतन तथा अन्य सुविधाएं दी जानी चाहिए ताकि वे संगठन में बने रहें।