जो सेना के शिविर में घुसने का प्रयास कर रहा था मार गिराया। घटना स्थल पर मौजूद सेना के अधिकारियों के अनुसार यह आतंकवादी कालचक जैसा घटना करना चाहते थे। जिसमें 30 से ज्यादा लोगो को आतंकवादियो ने मौत के घाट उतार दिये थे।
जो आतंकवादी भारतीय सीमा में घुसे है उनमें दो रविवार को मारे गये। सोमवार को बड़े हमले की योजना बनाकर आये थे। इसमें इनको पाकिस्तान के सुरक्षा बलों का सहयोग था। ब्रिगेडियर राकेश छिब्बर के अनुसार आतंकवादी सेना के शिविर के सुरक्षा गेट के तार को काटने में कामयाब हो गये थे, उसी वक्त सेना के जवानों ने देख लिया और उन्हें मार गिराया।
आपको याद होगा कि 2002 में इस तरह सेना के शिविर में घुसकर आतंकवादियों ने 30 लोगो की हत्या कर दी थी। उस समय के विदेश मंत्री जसवंत सिंह ने कहा था कि आतंकवादियों का यह आखिरी हमला होगा। नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच तनाव इतना बढ़ गया था कि दोनो देशों के बीच युद्ध की नौबत आ गई थी। छिब्बर के अनुसार रेडियो से मिले संदेश के अनुसार आतंकवादियों को निर्देश दिये जा रहे थे कि सेना के शिविर पर हमला करो। आतंकवादी लश्करे-ए तैयबा के छायावादी संगठन जिसका नाम, अल मसूरीयन है और इसका कार्यलय पाकिस्तान में स्थित है का सदस्य है।
सेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर के अनुसार सेना आतंकवादियों के मनसूबों को पूरा नही होने देगी, बर्फबारी के दौरान रास्ते में खराबी आ गयी थी उसको इस महींने अंत में पूरा कर लिया जायेगा।
वीएसएफ का कहना है कि कोई घुसपैठ नही हुआ है, सेना कहती है कि घुसपैठ हुआ तो वीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार सेना को सबूत पेश करना चाहिए। सच्चाई सामने है. सेना द्वारा तीन आतंकवादियों का मारा जाना इस बात का सबूत है कि घुसपैठ तो हुआ है। घुसपैठियों की संख्या मालुम करने की जरूरत है। सरकार ने भी वीएसएफ पर शिथिलता बरतने का आरोप लगाया है।
पिछले कई बार से यह आरोप लगे है कि वीएसएफ के जवान आतंकवादियों को सीमा पार करने में मदद करते हैं, पर इसकी पुष्टि नही हो पाती है। एक दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय दोनो सुरक्षा बलो को मिलकर घुसपैठियों को खत्म करने की जरूरत है न कि आपस में वाद विवाद करने की।