जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों के पहले सीमा पार से आए आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ बढ़ने की घटनाएं आर्मी हेडक्वॉर्टर के लिए चिंता की बात है। केरन सेक्टर में पाठरी बेहक के नजदीक सेना और आतंकवादियों के बीच जारी मुठभेड़ में पांच सैनिक मारे गए। इसके मद्देनजर यहां सैन्य सूत्रों का कहना है कि आतंकवादी अब पहले से काफी ताकतवर होकर यहां आ रहे हैं।
यहां सैन्य सूत्रों का कहना है कि, जनरल दीपक कपूर ने ही संवाददाताओं से कहा था कि जम्मू-कश्मीर में कुछ आतंकवादी अल कायदा और तालिबान के भी हो सकते हैं।
तालिबान द्वारा पाकिस्तान के कबायली इलाकों पर दबदबा बढ़ाने और यहां तक कि पेशावर पर प्रभुत्व जमाने की रिपोर्ट्स के बीच यहां सैन्य सूत्रों का कहना है कि तालिबान को पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान से ही काफी प्रोत्साहन मिला है। पाकिस्तानी सेना का एक वर्ग तालिबान के खिलाफ किसी कार्रवाई को सफल नहीं होने दे रहा है। पाकिस्तान में जनतांत्रिक शासन आने के बावजूद यहां सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल परवेज अशफाक कियानी ने कश्मीर के खिलाफ संघर्ष में आतंकवादियों को मदद का अजेंडा जारी रखा है और अब पाकिस्तानी सेना पहले से अधिक आतंकवादियों को मदद दे रही है।
इस मसले पर विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी की पाकिस्तानी विदेश मंत्री के साथ बात हुई थी और उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि नियंत्रण रेखा पर अब आतंकवादियों को घुसाने के लिए सेना से किसी तरह की मदद नहीं मिलने दी जाएगी। इसके बाद नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सेना ने गोलीबारी की घटना तो रोक दी है, लेकिन केरन सेक्टर में चल रही मुठभेड़ उन आतंकवादियों के साथ हो रही है जो जम्मू-कश्मीर में पहले ही घुसने में कामयाब हो गए हैं। हालांकि भारत ने 740 किलोमीटर लंबी नियंत्रण रेखा पर कंटीली बाड़ लगा दी है, लेकिन आतंकवादी इन्हें विशेष कैंची से आसानी से काट लेते हैं और भारतीय इलाके में घुसने में कामयाब हो जाते हैं। सूत्रों का कहना है कि आतंकवादियों को इस तरह के औजार और आधुनिक हथियार पाकिस्तानी सेना ही मुहैया करा सकती है।