दलाई लामा ने विश्व समुदाय से आग्रह किया है कि वे इस नाजुक दौर में तिब्बती जनता की ओर से बोलें। दलाई लामा ने तिब्बत के 'भयानक' हालात को देखते हुए चीन पर जोर डाला है कि वह चालू बातचीत को तेज करे। फिलहाल, सीक्रेट बातचीत के दूसरे दिन दोनों पक्षों ने मुलाकात की।
तिब्बत के आध्यात्मिक नेता ने चीन पर 'तिब्बती लोगों की खास सभ्यता और आध्यात्मिक विरासत' पर आक्रमण करने का आरोप लगाते हुए कहा 'आज तिब्बत एक बहुत ही नाजुक दौर से गुजर रहा है। तिब्बत के नागरिकों का जीवन दांव पर लगा हुआ है। वहां के हालात भयानक हो चुके हैं।'
तोक्यो की एक कॉन्फ्रेंस में पढ़े गए उनके पत्र में कहा गया है कि चीन के साथ चालू हुई ताजा बातचीत अहम मौके पर शुरू हुई है। इसी बीच, धर्मशाला स्थित तिब्बत की निर्वासित सरकार ने जानकारी दी कि दलाई लामा के दूत और चीनी अधिकारियों के बीच बातचीत दो दिन चलेगी। मार्च में तिब्बत में हुए हिंसक दंगों के बाद बातचीत का पहला दौर 4 मई को शेनजेन में शुरू हुआ था। इस विरोध को दबाने के लिए कम्युनिस्ट पार्टी ने भारी मात्रा में बल प्रयोग किया था। इसकी दुनिया भर में कड़ी निंदा की गई थी।
अभी तक बातचीत पर मौन रहने वाली चीन सरकार ने दलाई लामा पर तिब्बत में होने वाले विरोध के लिए जिम्मेदार ठहराया है। तिब्बत की कम्युनिस्ट पार्टी के नेता झांग किंगली ने कहा 'दलाई लामा ने पश्चिमी ताकतों के समर्थन से तिब्बत में विरोध प्रदर्शनों करवाए हैं। 14 मार्च की घटना के लिए उन्होंने लंबे समय से योजना बना रखी थी। उनका इरादा पूरी घटना को खूनखराबे में बदल कर पेइचिंग ओलिंपिक में बाधा डालने और तिब्बत के स्थायित्व और राजनीतिक शांति को बर्बाद करने का था।'
इससे पहले चीनी विदेश मंत्रालय के बयान में आशा जताई गई थी कि दलाई लामा के पक्ष के साथ 'संपर्क और बातचीत' से 'सकारात्मक प्रगति' की उम्मीद है। लेकिन इसके अलावा बातचीत के स्थान और उसके समय का खुलासा नहीं किया गया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था 'हमें केवल इस बात की जानकारी है कि केंदीय सरकार दलाई लामा के निजी प्रतिनिधियों से संपर्क करेगी।'